Na Usne Izhaar Kiya Or Na Hum Kabhi Ikraar Kar Paye

Na Usne Izhaar Kiya Or Na Hum Kabhi Ikraar Kar Paye

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम है मनीष और आज मै आपके साथ अपनी प्रेम कहानी शेयर करने जा रहा हूँ। दोस्तों ये बात है उन दिनों की जब मै अपनी मासी के गाओं छुटिया बिताने गया था। वह पर पास में एक दिन मैं और मेरा दोस्त राहुल, हम दोनों खेत में से गन्ने तोड़ने गए। जो गन्ने हम तोड़ रहे थे वो एक लड़की के पिता ने लगाए थे। वह लड़की बोलने लगी तुम यहाँ से भाग जाओ वार्ना बहुत पिटाई करुँगी। हम वह से चले गए। बाद में हम दोनों दोस्त अगले दिन फिर गए और उस लड़की को चिढ़ाने लगे। मगर इस बार उस लड़की ने हमें कुछ नहीं काहा। हम दोनों वहाँ से चले गए। फिर दो दिन बाद मेरी मुलाकात उस लड़की से दुबारा हुई। मैंने उसे बुलाया। फि मुझे समझ आयी के वो बुरी नहीं बहुत अच्छी है। इस तरह हम अच्छे दोस्त बन गए।

मै हर शाम को उसके खेत में से गन्ना लेने जाता। हम बहुत साडी बातें शेयर किया करते। जब मेरी छुटिया ख़तम हुई मेरा वापिस घर जाने का मन बिलकुल नहीं था और उसकी आँखें भी भरी हुई थी, शायद यही प्यार था। इस तरह मै हर बार छूटियों का इंतज़ार करता ता की मै उस लड़की से मिल सकूँ। इस तरह हर बार छुटियों में मै मासी के गाओं रहने चले जाता। इस तरह करते-करते पाँच साल बीत गए। और पाँच सालोँ के बाद उसकी शादी हो गयी। न मैंने उसे कभी अपने दिल की बात बताई और न ही कभी उसने इज़हार किया। हमारी प्रेम कहानी अधूरी की अधूरी ही रह गयी।

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