kahani ghar ghar ki – hindi story

मेरी शादी हुए सिफँ 4 महीने ही हुए है मेरी अपने पती से ज्यादा नही बनती न ही अपने ससुराल वालो के परिवार सेे । मुझे लगता है शायद मैने शादी करके गलती कर ली है पर मुझे नही पता लग पा रहा है कि मै क्या करू मै अपना दुख किस के साथ बाटु कई बार मैने यह बात अपनी मम्मी से भी कहने की कोशिश की पर मेरी मम्मी रोने के इलावा कुछ नही कर पाती और कहती है बेटी लडकियो के भाग्य मै ऐसा ही होता है तुम अपने पती की दिल लगाकर सेवा किया करो हर एक लडकी की तरह मेरा भी सपना था कि मुझे अपने पती का प्यार मिले पर क्या करू यह सब मेरे नसीब मे नही था मेरे पती आजतक कभी मुझे साथ लेकर कभी घुमने नही गए न ही कभी प्यार से बुलाया है मुझे लगता है शायद मै सिफँ उनके लिए उपभोग की चीज हुँ वो मुझे सिफँ use करने के लिए बुलाते है पर मेरा मन कभी भी इन बातो से खुश नही हीता हर समय़ मेरे मन पर एक बोझ रहता है कि मै अपनी सारी जिंदगी कैसे पुरी करूगी मेरा कभी कभी दिल करता है कि मै कही पर भाग जाऊ पर क्या करू मै ऐसा भी नही कर पा रही शायद मेरे मम्मी पापा ने कभी मुझे ऐसी बाते नही सिखाई है मैरे घर हर रोज किसी न किसी वात पर झगडा रहता है मै जब भी कभी किसी काम मे थोडा लेट हो जाऊ तो सारा परिवार मुझे गंदी गंदी गालियां निकालता है आजकल तो कोई काम वाली भी ऐसी बाते नही सुनती पर मेरी तो कुछ और ही मजबुरी है मै कही और भी नही भाग सकती मुझे लगता है मेरे परिवार मे मेरी जगह एक नौकरानी से भी कम है जब भी कोई घर मेहमान आता है तो सबके साहमने मुझे बेइज्जत किया जाता है कल तो हद ही हो गई मेरे देवर ने अकेले मे मुझ से गलत हरकत करने की कोशिश की जब मैने यह बात अपने पती को बतायी तो उन्होने कहा तुम अपना पहरावा देखो तुम ऐसे कपडे पहनोगी तो किसी का भी मन खराब हो सकतो है पहले तुम अपना पहरावा ठीक करो मै पुछना चाहती हुँ कि क्या लडकी अगर अपने घर मे भी safe नही है तो बाहर वालो से क्या ऊमीद की जा सकती है पर मै यहा पर कहना चाहती हुँ कि अब मै क्या करू