Meri ek Story- in Hindi

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Hello Friends, मेरा नाम Vikram है | ये बात 4 साल पहले की है जब मैं अपने गांव से मुंबई आया था | मैं और मेरा भाई गांव में ही पढ़ते थे | बाकी सब मुंबई में ही रहते थे | मेरे बड़े भाई के एक दोस्त थे | वो भी उनके साथ एक ही जगह काम करते थे | वो दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे | यहां भी घुमने जाना हो तो साथ में ही जाते थे | हमारी और उनकी Family भी साथ में ही घूमनें जाती थी | मेरे भाई के दोस्त की दो बहने थी | एक बहुत ही Simple और दूसरी बहुत ही सुंदर थी और उनके Mummy-Papa थे | उन दोनों में से एक का नाम Nitasha था जो कि सुन्दरता कि मूर्त थी | हम लोग अक्सर सब साथ घुमने जाते रहते थे | मैं कुछ बोलने में तेज़ होने के कारन उन सब के साथ घुल-मिल गया | मैंने अपना Job छोड़ दिया था और दूसरी Job ढूंढ रहा था | इसकी वजह से मैं पूरा दिन घर से बाहर रहता था | और मैं अपने बभी के दोस्त के घर चला जाया करता था | उनकी बहन Nitasha और मेरा स्वभाव एक ही जैसे था और हमारी दोनों की बहुत बनती थी | सारा दिन वहां ही रहता था | धीरे-धीरे मैं और Nitasha आपस में बहुत सारी बातें करने लगे | हम दोनों एक दुसरे कि बातें बहुत ही ध्यान से सुनते | धीरे-धीरे हम दोनों एक-दुसरे के करीब आने लगे | मैं जब भी उनके घर जाता हम दोनों बातें करने लगते | मैं उन सब को चुटकले सुनाता और हसाता था | जब घर के लोग बाहर जाते तो हम दोनों खूब बातें करते थे | ना जाने हम दोनों के बीच आजीब सा लगाव था | हम दोनों लापरवाह थे | हमारे बीच कौन सा Relation है इसके बारे में कुछ सोचा ही नही | हर दिन एक-दुसरे को देखने की इच्छा रहती थी | ऐसे ही चलता रहा रहा फिर अचानक से वो मुझसे दूर-दूर रहने लगी | उसने बोला कि आप मुझे बात मत किया करो | मैंने बोला चलो नही बात करनी तो ना करो पर मैं आपसे जरुर बात करूंगा | तब तक मुझे Job भी मिल गया था Branch Manager Post का | पर मैं उनके घर दिन में एक बार जरुर जाता था | छुट्टी कि दिन सारा दिन उनके घर में ही बताता था लेकिन उससे बात नही होती थी | अब तो मैं उसे देख भी नही पता था क्यूंकि मैं जहाँ भी जाता जाता वो वहां से चली जाती | धीरे-दहिने हम लोगों का मिलना कम होने लगा अब वहां जाना भी अच्छा नही लगता था | ऐसे ही दिन निकलते चले गये | फिर मुझे उसकी बहन से पता चला कि पता नही वो उदास क्यों रहती है और सारा दिन रोती रहती है | ये बात सुनकर मुझे बहुत दुःख होता | एक दिन मैं उसके घर गया तो तब भी वो रो रही थी | मैंने उसके Mummy से पूछा क्या हुआ तो वो बोले कि पता नही हमें कुछ बताती नही है तो मैं उसके सामने जाकर कुर्सी पे बैठ गया और वो जमीन पर बैठी हुई थी | मैंने उसे बोला कि क्या बात है क्योँ रोती हो उसने बोला कि आप मुझे क्या समझते हो तो मैं कुछ नही समझ पाया अचानक ही मेरे मुंह से बोला गया कि तुम Rahul भाई की बहन हो तो मेरी भी बहन हो तो वो मेरे पांव पकड़ कर रोने लगी बोली कि मैं तो आपके बारे में कुछ और सोच रही थी तो मैंने उससे पूछा कि क्या सोच रही थी तो उसने कुछ नही बताया | मैं सोच रहा था कि मैं सच में उसे बहन मानता हूं | मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था | उसने मन में सोच रखा था ये बात पिछले सावन की है इसके दो दिन बाद ही राखी का त्योहार था सुबह ही मैंने अपनी बहन से राखी बंधवाया और घूमनें के लिए दोस्तों के साथ चला गया | शाम को वापस आया तो मेरे फ़ोन कि Bell बजी तो मैना देखा Nitasha का ही फ़ोन था उसने बोला मेरे घर आयो मुझे आपको राखी बांधनी है | मैंने सोचा कि वो मजाक कर रही है | तो मैं उसके घर कि तरफ चल पड़ा जब-जब उसका घर करीब आ रहा था मैं डगमगा रहा था दिल में डर पैदा होने लगा था | कैसे-कैसे मैं उसके घर पहुंच गया घर में वो और उसकी बहन थी | उसकी बहन को मैं दीदी बोलता था | मैं कुर्सी पे बैठा और उसकी बहन आई और मुझे राखी बंधी और मैं ख़ुशी-ख़ुशी बंधा ली | थोड़ी देर वो सफ़ेद रंग का सूट पहनकर बाहर आई | मैं तो उसे देखने में ही व्यस्थ था उसने मेरा हाथ पकडकर हाथ सीधा करने को कहा तो मैंने नही किया और उसने फिर बोला और मैंने फिर नही किया वो बार-बार बोलने लगी तो मैंने मजबूरी में हाथ सीधा कर दिया तो सच्च में वो राखी बांधने लगी | मैं चाहते हुए भी उसे रोक नही पाया | उस समय मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई मेरे प्राण निकाल रहा है आँखों में आंसू आ गये थे और मैं रो भी नही सकता था | दिल बहुत ही ज्यादा रो रहा था | उस दिन से मुझे खुद से नफरत हो गयी | मैं कुश भी खाता पीता नही था और सबसे दूर रहने लगा था और बहुत रोता था किसी से कोई बात नही करता | दफ्तर में चुप करके बैठा रहता और घर भी देरी से आता | मेरे घर के पास ही एक छोटा बच्चा है जिसके साथ मैं बहुत मजे करता था | वो रोज़ मेरे पास आता और पूछता क्या हुआ और मुझे हसने कि कोशिश करता | आगे कि कहानी फिर कभी दोस्तो अब मुझे लिखा नही जा रहा ……………..