Moral Story

Please share...Share on FacebookShare on Google+Tweet about this on TwitterShare on StumbleUponDigg this

एक बार मेरे घर में चीटियों की टोली लाइन बना कर जा रही थी | सारे घर वाले उससे बहुत परेशान हो रहे थे | मेरा भाई ने कहा मैं करता हूँ इसका इलाज | उसने चप्पल ली और चीटियों पर बरसा दी | सारी चीटियाँ मर गयी |

अगले दिन फिर वही हुआ | चीटियों की लाइन दुबारा देख कर मेरे भाई ने वही तरीका दुबारा दोहराया | देखते ही देखते तीसरे दिन फिर दुबारा चीटियाँ उसी तरह से झुण्ड बना कर वह से जाने लगी | पर अब मैंने दुबारा सहन नहीं किया और उसका कोई दूसरा इलाज ढूंडा | मैंने हल्दी चूर्ण लिया और उस जगह पहुच गया जहाँ से चीटियाँ आ और जा रही थी |

वह पर मैंने काफी सारी हल्दी छिड़क दी | थोड़ी देर बाद चीटियों का झुण्ड गायब हो गया फिर दुबारा कभी नहीं बना | यह देख मेरे पिता जी ने मुझे अपने पास बुलाया और घर में सबके आगे मुझे शाबाशी दी | जब मेरे भाई ने उनसे इसका कारण पुछा तो उन्होंने कहा बेटा हमेशा मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है | तुमने चीटियों को मार कर दूर किया पर इसने उन्हें हल्दी से भगा कर | जिससे उनकी जान भी बच गयी और वो वहां से चली भी गयी |