True Love Stories In Real Life In Hindi - Kisi Ke Door Jane Se

True Love Stories In Real Life In Hindi – Kisi Ke Door Jane Se

हेलो फ्रेंड्स, आज मैं सिद्धार्थ अपनी लव स्टोरी आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ। मैंने सुना था प्यार में स्मार्ट और इंटेलेगेंट इंसान भी पागल बन जाता है, मगर मैं इस बात को नहीं मानता था। उसका सबसे बड़ा कारन था की मैं प्यार में विशवास ही नहीं करता था क्योंकि मेरी माँ ने मेरे बाबा को डाइवोर्स देकर दूसरी शादी कर ली थी और मुझे बचपन में ही अकेला छोड़ कर चली गयी थी। बचपन से ही मैं अपने बाबा और दादी के साथ रहा हूँ। लेकिन एक दिन मैं अपनी बाइक पर जॉब के लिए जा रहा था और मेरी बाइक एक कार से टकरा गयी। उस दिन मेरी लाइफ में सुनैना आयी। सुनैना ग्रेजुएशन कर रही थी और मैं छोटी सी कंपनी में जॉब करता था। सुनैना बहुत आमिर घराने से थी। पता नहीं उसे देख कर मेरे दिल में क्या हल-चल पैदा हुई और मैं अपना दिल उसे दे बैठा।

उस दिन सुनैना ने मुझे बहुत बुरा-भल्ला काहा मगर उसकी डांट का मुझपर कोई असर नहीं हुआ, दिल कह रहा था बस वो इसी तरह बोलती रहे। उस दिन ऐसा लग रहा रहा था जैसे मेरे पैरों के निचे से ज़मीन हिल गयी हो और मैं आसमान में झूम रहा हूँ। सुनैना रोज़ उसी रस्ते से जाती थी और उसे देखने के लिए मैं रोज़ उसी जगह पर आकर उसकी वेट करता था। वो भी मुझे रोज़ नोटिस करने लगी। एक दिन उसने कार रोकी और मेरे पास आकर कहने लगी मुझसे दोस्ती करोगे। मैं हैरान था और सब कुछ एक सपने की तरह लग रहा था। मैं तो कबसे उससे दोस्ती करना चाहता था मगर आज तक उसे बोलने की हिम्मत नहीं हुई। मैंने उसे कहा हाँ करुनुगा दोस्ती। इस तरह हम दोस्त बन गए।

धीरे-धीरे ये दोस्ती प्यार में बदल गयी और जैसा वो कहती मैं बिलकुल वैसा ही करता। आखिर सही कहते हैं प्यार में स्मार्ट और इंटेलेगेंट इंसान भी पागल बन ही जाता है और मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। फिर एक दिन सुनैना ने मुझे अपने पापा से मिलवाया। कुछ दिनों बाद मैंने सुनैना के सामने उसके पापा से सुनैना का हाथ माँगा मगर सुनैना ने तब मुझे ज़ोर से चांटा मारा और कहने लगी तुम ये क्या कह रहे हो। तुम्हे गरीब बेचारा समझकर तुमसे दोस्ती क्या कर ली तुम तो मेरे सर चढ़ने लगे। इस तरह उसने मेरी बहुत इनसल्ट की। मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकता। मैं ही पागल था जो उसके प्यार में अंधा होकर बैठा रहा। कोई भी लड़की प्यार करने के लायक नहीं होती। उनके लिए सब कुछ पैसा ही होता है और कुछ नहीं।

मेरी बेफ़कूफी की सज़ा तो मुझे मिल गयी मगर आप इस तरह की बेफ़कूफी मत करना। मैंने तो सच्चे दिल से महोबत्त की थी। शायद मेरी किस्मत में ही प्यार न लिखा हो। बचपन में भी माँ मुझे छोड़ गयी थी और अब सुनैना। मुझे लगता है मैं ही सबसे बड़ी पिनोति हूँ………

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